Tuesday, October 20, 2009
Monday, August 3, 2009
मेरी पसंद
मेरी नई साडीया
एक नीली राजस्थानी लहेरिया है और एक शिफोन पिंक
दोनों में ख़ास ज़री का सुन्दर काम है...

Tuesday, June 9, 2009
Sunday, June 7, 2009
कक्का जी एवं बाई

कक्का जी का पूरा नाम श्री कोमल चन्द्र जैन है, कक्का जी के पिता श्री कन्हैया लाल जैन गिद्वाहा के रहने वाले थे. माता-पिता का स्वर्गवास बचपन में ही हो जाने के कारण कक्का जी को काम की तलाश अपने तीन भाईयो और दो बहनों के साथ सागर आना पढ़ा. सागर में उन्होंने एक छोटी सी दुकान में बहुत कम पैसो में काम शुरु किया और अपने छोटे भाई की पढाई पूरी करने में आर्थिक सहियोग दिया. धीरे धीरे उन्होंने अपना स्वयं का बिज़नस शुरू किया. सबसे पहले उन्होंने किराने की दुकान खोली और बाद में किराने का थोक व्यवसाय किया. आज वे सागर के एक प्रतिष्ठित किराना व्यापारी है..कक्का जी के सबसे बड़े भाई स्वर्गीय धन प्रसादजी जैन, मंज्ले भाई श्री रन प्रसाद जी जैन है. सबसे छोटे भाई श्री कपूर चन्द्र आयुर्वेदाचार्य है. दो बहिनों के नाम स्वर्गीय सुगना जैन एवं श्रीमती नन्ही बाई जैन है. बाई का पूरा नाम श्रीमती हीरा बाई जैन है. बाई दो बहिनों तथा दो भाइयो की लाडली बहिन है. उनकी बड़ी बहिन का नाम श्रीमती मीरा बाई जैन [इंदौर] है, तथा छोटी बहिन का नाम नन्ही बाई है. बड़े भैया स्वर्गीय गुलाब चन्द्र जी जैन तथा छोटे भैया स्वर्गीय रमेश चन्द्र जैन है.ऐसा अनुमान है है की कक्का जी तथा बाई का विवाह 1948-50 के बीच हुआ.
Saturday, June 6, 2009
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